सोमवार को मेरे पिताजी अपने नौकरी से अबसर ले रहे हैं। और यही एक बात है जो ओन्हें परेशान किया हुआ है की के ओसके बाद वो घर मे क्या करेंगे । मुझे पहले से ही ये पता था तभियो मैंने बाबा को एक ख़त भी लिख है जो आज या परसों घर पहँच जाएगा । मेरे पापा जो की आज भी इंटरनेट की दुनिया से कोसो दूर है और मेरा ख़त बड़े प्यार से पढ़ते हैं उनको एक मेसेज पहंचाने का ये सबसे अछा उपाय लगा और मैं ऐसे मौके मैं कभी नहीं छोड़ता । मेरे इस ख़त मे मैंने ये बताने की कोशिश की है की मुझे घर की सारे समस्याओं का आभास है मैं इन सब को दूर करने हेतु मैं प्रयासरत हूँ। ओनके परेशान होना भी उचित है पर अब वो अब्सर्प्राप्त हो चुके हैं और ओन्हें अब ये सब काम मुझपे छोड़ के आराम करना चाहिए । वो ख़ुद भी ये समझते हैं पर समस्याओं की जतिलताओं को देख के वो अपने कर्ताव्य से मुख नहीं मोड़ पा रहे हैं। तभी मैं ठीक टाइम पे घर जा रहा हूँ । इस मौके पे मैं ओन्हें समझाने की कोशिश भी करूँगा पर बाप का दील भी कहाँ मानता हैं। मैं अगले माह २७ तारीख को घर जा रहा हूँ । मेरे छोटे मामाजी की शादी जो है। सारे रिश्तेदार भी आ रहे हैं । पर मेरा पूरा ध्यान मेरे बाबा पे ही रहेगा जो अभी बहुत अकेले महसूस कर रहे होंगे। इस बार सोच रहा हूँ सबको लेके पुरी जगन्नाथ दर्शन के लिए चला जाऊं । माँ भी कह रही थी की आज तक जगन्नाथ दर्शन भी नहीं किया ओन्होने । तो इस बार सोच रहा हूँ सबको जगन्नाथ दर्शन करवा लाऊँ। मुझे पटही नहीं चला कब ओंको ५८ साल हो गए और हम इतने बड़े हो गए। कल जैसा लगता है जब पापा मुझे कहा करते थे की बाहर जैसे रहे हो घर से। ये मत करना ऐसे मत रहना ये करना इत्यादी इत्यादी । पर समय आज जैसे ठहर सा गया है ओनके लिए और वो आज इस मोड़ पे हैं की आज वो अब्सर्प्राप्त हो गए पर सिर्फ़ अपने काम से हमारे लिए तो आज भी वो हमारे लिए ओटने ही प्यारे और सम्माननीय रहेंगे जैसे वो पहले थे और हमेशा रहेंगे। मुझे ओंकी बड़ी याद आ रही है । मुझे याद है जब ओंका ऑपरेशन हुआ था तिरुवानान्थापुरम पे टैब ओनके अभिसंधिचूं आखून को मैं कैसे भूल जाऊं। ओनके प्रश्नावाची आखून को जवाब देने का सहस मुझमे नहीं था। अकेले जिस तराह से ओन्होने जिंदगी को परास्त किया है ये सराहनीय है और मेरे लिए वो सदैव पूजनीय रहेंगे.मैं जब घर पे होंगा टैब सबका ध्यान मामाजी की शादी की तरफ़ होगा परन्तु मेरा ध्यान तो मेरे पीताजे पे ही होगा। प्रयास करूँगा के मेरासमय ओनके साथ बिताऊँ। इस बार सोच रहा हूँ ओनके लिए दो शर्ट और माँ के लिए एक सारी भिऊ ले जाऊं। सोचोंगा और पूरा ध्यान रखूँगा के ओंको सुनों….
ନିଜ ସ୍ୱପ୍ନକୁ ତ୍ୟାଗ କରି ମୋ ସ୍ୱପ୍ନକୁ ଡେଣା ଦେଇଥିବା, ନିଜ ସୁଖକୁ ଉତ୍ସର୍ଗ କରି ମୋ ଜୀବନକୁ ଆଲୋକିତ କରିଥିବା ପରମ ପୂଜ୍ୟ ମା' ଓ ବାପାଙ୍କ ଚରଣରେ ମୋର ଅକୁଣ୍ଠିତ ଶ୍ରଦ୍ଧା ଓ ପ୍ରଣାମ। 🙏 To my beloved parents, who sacrificed their dreams to nurture mine and dedicated their happiness to brighten my life's journey, I offer my deepest respect, gratitude, and heartfelt pranam.
Tuesday, June 17, 2008
मेरे पापा की last day of working (३१ मार्च २००८)
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