Saturday, September 13, 2008

इस साल वो दिन ...

मैं नहीं मनाता पर कुछ दोस्तों के जबरदस्ती के लिए मैं मनाता। पर वो भी आधे मन से रहापर इस साल नहीं।
उस दिन ऑफिस भी है और मेरा उपवास भी। भले ज़िन्दगी का एक साल कम ओहो गया हो पर ज़िन्दगी की स्कूल मैं एक और कक्ष्या मैं मैं पास हो गया। इस साल मैं वो दिन नहीं मनाऊंगा। पुरे ज़िन्दगी मैं जितने भी पाप किए हैं इन सब के लिए माफ़ी मांगूंगा भगवन से। कुछ कम ही हैं मगर कुछ ऐसे गुनाह भी हुए हैं मुझसे जिस के लिए मुझे भगवन कभी माफ़ नहीं करेगा। पर मैं भरपूर कोशिश करूँगा के मेरा भगवन मुझे इन सब चीज़ों के लिए माफ़ कर दें। आदमी कितना स्वार्थी होता है ना। पहले गलती करता है और उस गलती से बचने के लिए भगवन से माफ़ी भी मांगता है। क्यों मैं इतना स्वार्थी हो गया और क्यों मैं इतना कम्जूर हो गया के मुझे किए गए काम ही मुझे ग़लत लगने लगे हैं। क्यों मुझे मैं इतनी शक्ति नहीं दी भगवन ने की मैं समस्यों से लढ सकूँ। ये सारे सवाल मैं पुचुन्गा । पुरा दिन मैं अपनी गलतियों को सूधारने मैं और अपने आप को इन सारेगुनाहों से मुक्त करने की कोशिश करूँगा। ये दिन उसके और भगवन के नाम...

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