Wednesday, September 10, 2008

मेरे संपनो के गलियारों से ....

बड़ा सोचने के बाद मैं अपने सपनो को आखिरी रूप देने के लिए अपने नपे तुले कदम बढ़ा दिया है । अब सुबह श्याम बस वही सारे सवाल और उनके जवाब धुन्दने मैं लगा रहता हूँ। सारे दूसरे काम मेरे लिए कुछ कम एहमियत के साथ मेरे लिए इंतज़ार करते रहते हैं। मेरे सपनो को हकीकत मैं बदलने के लिए बहुत सारे काम बाकि है और मैं भी अपने पुरे होशो हवास के साथ उसको पुरा करने मैं जुट गया हूँ। बहुत जल्दी मैं दुनिया के सामने अपने सपनो को लाऊँगा और उसे आस्मां से आगे भी लेके जाऊंगा...
इन-सा-अल्लाह॥ आमीन...

2 comments:

  1. आपके भाव बहुत सुंदर हैं .....लाजवाब लिखा है....

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  2. आपकी हौसला अफजाही के लिए शुक्रिया...

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