Thursday, September 11, 2008

केहर बरसती है...

निगाहों से करे दिल की बातें बयान वो कुछ इस अदब से
दीदार हो एक नज़र तो, कोई कमसिन कायल केहर बरसती है...

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मेरी दास्तां ...

  क्या बताऊँ मैं अपनी दास्ताँ, ए दोस्त  हर मोड़ पे किसी अपनों ने ही आजमाया है....