Friday, September 19, 2008

डरता हूँ अंधेरे से मैं


डरता हूँ अंधेरे से मैं ये पता था उन्हें मगर
बिछड़ के मुझसे रौशनी मेरी ही मिटा दी
इतराता था मोहब्बत बन के जिसका कभी
केह्के बेवफा जालिम ने दिल ही तोड़ दिया

2 comments:

  1. aapki rachna ki prshnsha me jitna bhi khoon km hai.... smrpit rhiye..

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Srirangam Perumal.

I have always been inclined towards the spiritual and cultural heritage of Tamilnadu and the great and magnificent temple architecture and I...