Saturday, August 09, 2008

दबाओं को भी अपने साथ कर रखा है !!!


ज़ख्मो का यूँ बे इंतेहा बढ़ना तो हम पूछा किए

मालूम हुआ के जालिम ने दबाओं को भी अपने साथ कर रखा है !!!

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मेरी दास्तां ...

  क्या बताऊँ मैं अपनी दास्ताँ, ए दोस्त  हर मोड़ पे किसी अपनों ने ही आजमाया है....