Wednesday, December 03, 2008

एक सपना रोज़ पाल लेता हूँ

एक अनहोनी की आड़ में मैं एक सपना रोज़ पाल लेता हूँ
थामे दामन उम्मीद का, रोज़ मौत से ज़िन्दगी छीन लेता हूँ
यूँ तो मोहब्बत में मैं सदियाँ जी लेते और हो जाता बदनाम
पर बिछड़ के उससे इज्ज़त से मैं रोज़ मौत पी लेता हूँ ...

No comments:

Post a Comment

Srirangam Perumal.

I have always been inclined towards the spiritual and cultural heritage of Tamilnadu and the great and magnificent temple architecture and I...