Monday, January 05, 2009

मोहब्बत से बच के दिखाओ तो जाने ...


कत्ल के होंगे हज़ार तरीके इस जहाँ मे मगर
काफिर इस मोहब्बत से बच के दिखाओ तो जाने ...

2 comments:

  1. बारिश की महीन फुहारों में
    जब तन मन भीगे जातें हैं
    उनकी खामोश निगाहों के
    वो पल तो ही तरसाते है
    क्यों बोल नहीं सकते है वो
    क्या अजब है उनकी ख़ामोशी
    हम चुप्पी की भाषा सुनकर
    बस मन ही मन इतराते है
    वो हवा हवा ही रहते है
    और आस पास मंडराते है
    जाने उनके दिल में क्या है
    पर हमको बहुत सताते है
    पर हमको बहुत सताते हैं

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