तो हमने रस्ता मन्दिर का बताया ।
यूँ तो खुदा यहाँ भी था मौजूद मगर,
खुदाया दोनों मे ने मेरी बात ना मानी
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
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