ନିଜ ହାଡ଼ କୁ ପବ ପବ କରି ଚୁନା କରି ମୋ ମନରେ ଯିଏ ସୁନାର କଳ୍ପନା ସୃଜନ କରନ୍ତି, ମୋ ଓଠରେ ଟିକିଏ ହସ ଦେଖିବା ପାଇଁ ନିଜର ଆଖିର ତତଲା ଲୁହକୁ ଦେହର ଶିତଳ ଲହୁ ସହିତ ଯେ ମିଶାଇ ଚାଲିଥାଆନ୍ତି... ନିଜ ଜ଼ିବନର ସୁଖ ସଳିତାକୁ ତିଳ ତିଳ କରି ଜାଳି ମୋ ଜୀବନର ଚଳପଥକୁ ଆଲୋକିତ କରିବାରେ ଯିଏ ବ୍ୟସ୍ତ, ମୋତେ ମଣିଷ ପରି ମଣିଷ କରି ଗଢି ତୋଳିବା ପାଇଁ ଯିଏ ସର୍ବଦା ବ୍ୟଗ୍ର... ସେଇ ପରମ ପୂଜନୀୟ ମା ବାବାଙ୍କ ପାଦପଙ୍କଜରେ ଭକ୍ତି ଅର୍ଘ୍ୟ ଅର୍ପଣ
Saturday, June 19, 2010
टाटा स्काय लगा डाला तो लाइफ झींगा ला ला !!!
मेरे खेल भावना को तब एक जोर का झटका लगा जब मैं बर्तमान दक्षिण अफ्रीका में चल रही फूटबाल महासंग्राम में आर्जेन्टीना के पहले दो खेल देखने से बंचित रह गया। यूँ तो मैं किसी मौके को चोदता नहीं मगर किसी कारन बस ये मैच मुझसे छुट गए। इससे बौखलाए मैंने तुरंत फ़ोन लगाया और सच्चे भारतीय होने के नाते फ़ोन पर ही एक DTH खरीद डाला। पर्मेरी किस्मत देखिये के इसे इन्स्टाल करनेवाला वो कर्मचारी की इंतज़ार मैं मैं अब भी अपने आप को कोष रहा हूँ। पर एक बात तो है की "ज़ल्दी का काम सैतान का " ये मैंने सिद्ध कर दिखाया। और धन्यवाद है भारत में दूरसंचार के प्रगति और सर्कार की प्रतिबद्धता को जिसने हमें गुमराह करने वाली निजी कंपनियों के साथ मिलके अच तरीका निकला हमें परिहास करने का। पर कोई बात नहीं हम भी लाखो भारतीयों की तरह चुप चाप हमारा समय बदलने तक इंतज़ार करेंगे। और जीस दिन सर घूम गया उस दिन सारे भड़ास जैसे भी निकलेगा सबके लिए बुरा होगा॥ वाहरे मेरा खेल भावना और टाटा स्काय
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