Saturday, November 20, 2010

माँ का क़र्ज़

शाम का समय था और मे थका हारा घर पहंचा और क्यों की मेरा मूड था खाना बनाने का तो मे रसोई की तरफ बढ़ गया। अब श्रीमती जी बड़ी खुस हुईं पर qमैंने कहा की एक प्याली चाय की मिल जाती तो अछा होता तो तुरंत चाय भी मिल गई। अब काम eकरवाना किसको पसंद नहीं , खैर कोई बात नहीं जब मुझे ही मूड था बनाने का तो कुछ और नहीं सोचा। मज़े की qबात यह थी की तब तक चावल और दाल बन चूका था और मुझे सिर्फ तरकारी बनानी थी। मे झटपट सब्जी eकटाई ख़तम कर कड़ाई बिठाया और सब्जी चढ़ाके टीवी के सामने बैठ गया। ऐसे ही चैनल बदलते बदलते मे आंचलिक मेरे qमातृभासा ओडिया चैनल तरंग पे रुक गया क्यों की उसके एक कार्यक्रम जिसका नाम है "Excuse Me"आ रहा था। उसपे एक हास्य कलाकार ने हसाते हसाते एक संगीन बात कहदी जो मेरे दिल को छु गई और वही मे आज यहाँ लिख रहा हूँ ...
बुजुर्गो पर हो रहे अत्याचार और ब्याभिचार के बारे मे तो आप rलोगों ने बहूत साडी कहानियाँ , फिल्में और किसे सुने होंगे ये एक अलग एहसास होगा। एक बार एक बेटे ने अपने माँ को बोला के माँ तुने बड़े कष्ट सह कर मुझे इस लायक बनाया के मे आज दुनिया के साथ कंधे से कन्धा मिला के चल पा रहा हूँ और मे बड़ा भाग्यशाली हूँ के मुझे तेरा साया मिला। और आज मे जो भी कुछ हूँ तेरी वजह से और मे तेरा ये क़र्ज़ कैसे उतरून और क्या करूँ ऐसा के तेरा क़र्ज़ , उपकार मे उतार सकूँ ? इस्पे माँ ने बोला के बेटा कोई बात नहीं , तुने इतना सोचा और कहा तो मुझे दुनिया मिल गई , मुझे और कुछ नहीं चाहिए। पर बेटा कहाँ मान ने वाला था , उसने तो जिद ही पकड़ ली थी की क़र्ज़ उतार के ही रहेगा तो मान ने कहा ठीक है अगर ऐसा करने से तुझे अच्छा लगेगा तो एक काम करना , आज रात तो तू मेरे साथ सो जाना। तो बेटे ने कहा ठीक है... दिन गुज़रा और रात हो गई तो बेटे ने भर पेट बोला के कोईया माँ के के साथ बिस्तर पे लेट गया। रात का पहला प्रहर था के माँ ने बेटे के ऊपर एक गिलाश पानी दाल दिया। बेटे को आई अछी नींद टूट गई और उसने माँ से कहा के माँ सो जाओ को बात नहीं है। माँ ने भी बात के ध्यान नहीं दिया और सो गई। रात का दूसरा प्रहार था और माँ ने बेटे के ऊपर दोसरा गिलास पानी डाल दिया तो बेटे ने कहा माँ सोने दो ऐसा मत करो। माँ बाते फिर सो गए। कुछ देर हुए तो माँ ने फिर एक गिलास पानी दाल दिया। इस बार बेटे ने गिस्से से उठा पर माँ से कुछ बोल नहीं पाया तो माँ ने एक मृदु हास्य दिया और सो गई। देर रात ३ से ४ का वक़्त होगा माँ ने ५ब गिलास पानी दाल दिया तो बेटा गुर्राया सा उठा और माँ को बोला क्या ये घडी घी मजाख बना रखा है , सोनी भी नहीं देती आराम से। एक तो मैंने तेरा क़र्ज़ उतारने पे तुला हुआ हूँ और तू है की मुझे आराम से सोने भी नहीं देती। इस बार माँ ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा " बेटा एक तो तुम मेरे क़र्ज़ उतारने की बात करते हो और मुझे दांते भी हो। मैंने तुझपे ५ बार पानी ही डाला तो एक रात मे तुने इतनी बातें मुझे सुनाया। पर बेटे तुने तो सालों मुझपे ऐसे कई बार पानी फेका , पानी नहीं पेसाब किया पर मैंने तो आज तक तुझे कुछ नहीं कहा ... इतने कहते ही बेटे ने रोते बिलकते माँ के कदमो मे गिर गया और माँ से माफ़ी मांगने लगा और कह माँ मे नादाँ हूँ और मे क्या कोई भी इंसान अपनी माँ का क़र्ज़ कभी नहीं उतार सकता... क्यों सही कहा न...

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