Wednesday, April 15, 2009

सबब मुझसे मांगेंगे ...

ना आना कभी मेरे मजार पे यूँ तुम
और ना ही घूंघट उतरना यहाँ
है ये आज महफिल मुर्दों का यहाँ जो
झूम जाए कोई तो सबब मुझसे मांगेंगे

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Samajh jata hun teri khamoshi magar..

Samajh leta hun main  khamoshi teri magar , Rok lun chahat ko apni ye bhi tujhse suna hai.