ना आना कभी मेरे मजार पे यूँ तुम
और ना ही घूंघट उतरना यहाँ
है ये आज महफिल मुर्दों का यहाँ जो
झूम जाए कोई तो सबब मुझसे मांगेंगे
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
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