Thursday, August 11, 2011

आज शिर्डी गया था

आज शिर्डी गया था बाबा के दर्शन किये पर भीड़ बहत थी और बाबा भी बिजी थे,aur हो भी क्यों ना जब मेरे जैसे जाने कितने लाखो करोडो भक्त उनको हमेशा याद और पूजा में लगे जो रहते हैं. पर बाबा वहां आनेवाले किसी की भी अनदेखी नहीं करते और सबकी सुनते हैं  और उनकी फरियादें अपने " to do " लिस्ट मैं लिख लेते हैं.सुबह सुबह  ये दर्शन अछा रहा. फिर मैंने अपने कंप्यूटर ओं किया और कम पे लग गया.आप घबराये मत क्यों की मैं मन मैं और खयालो मैं ही शिर्डी चला गया था मेरा पार्थिव शारीर तो यहीं छुट गया था.क्या जरुरी है की मैं अपना ३० साल का गन्दा बदन लेके ही जून.मेरा मन तो जा सकता है ना बाबा से मिलने और उनका दर्शन करने तो मैं कर आया.बाबा ने भी मुझे देखा और आशीष दिया. आप लोग कुछ भी कहो ...बाबा की जय हो ...

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Samajh jata hun teri khamoshi magar..

Samajh leta hun main  khamoshi teri magar , Rok lun chahat ko apni ye bhi tujhse suna hai.