Monday, June 20, 2011

ab main kya kahun...


ना मिले जायज़ अल्फास जुबान को मेरे तो 
मुहब्बत को बयान तेरा नाम लिखता गया और पढता गया 


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मेरी दास्तां ...

  क्या बताऊँ मैं अपनी दास्ताँ, ए दोस्त  हर मोड़ पे किसी अपनों ने ही आजमाया है....