Tuesday, March 29, 2011

आसमां की कदर

है चाँद को भी कहाँ कदर उस आस्मां की
यहाँ जमीन से निहारो तो ही पता चलता है ....

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Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...