Friday, February 13, 2026

Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं,
हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं।

जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं,
वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे हुए हैं। 

Mahshar Afridi

मेरी दास्तां ...

  क्या बताऊँ मैं अपनी दास्ताँ, ए दोस्त  हर मोड़ पे किसी अपनों ने ही आजमाया है....