Wednesday, September 16, 2009

खुदाया खामोखां क़यामत कौन झेलेगा ...


संभल अये शेहजादी हुस्न तू अपना आँचल मैं अपनी, और बख्श दीवाने दिल की अरमानो को।

काफिला आशिकों का है ये दुनिया, भनक तेरे दीदार का तो खुदाया खामोखां क़यामत कौन झेलेगा ...

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