मोहब्बत से बचता रहा ता-उम्र यूँ , पर मदहोश अदाओं से उनकी कौन बच पाया है
जी लेता मैं ज़िन्दगी उसकी पनाह मैं यूँ पर कातिल उनकी निगाहों ने हमें मार डाला।
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
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