Friday, September 26, 2008

theme, the One man army ...

गर हो तुम दहशत मे तो पनाहों मैं आओ

और हो शिकस्त से परेशान कभी तो आँखें हमसे मिलाओ

न होगी कभी किसी भी सुलतान से शिकस्त कभी

है एक अजूबा ऐसा, एक तिलिस्म तुम तोहफे मे ले जाओ.

न करे खुदा के पड़े जरुरत हमारी भी कभी तुम्हे,

बस एक आवाज़ देना,और देखना तमाशा तुम

कब्र की दीवारों से भी तुम्हें ललकार सुनाई देगी

और हर मंज़र हर पल तुझसे खुद की खैर मांगेगी ...

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Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...