Thursday, September 11, 2008

तेरा गुलाम कहलायेगा


चले हम रस्ते खुदा के, कर चले नाचीज़ ये दिल आपका
रखना अये शेह्ज़दी-ऐ-हिन्द संभल के इसे
न होने देना बेगैरिया का एहसास कभी
था जिस्म मैं जब तक ये धड़कन इसमे तुम्हारी ही थी,
और थी सांसे हमारी कभी जो इसकी पनाह मैं ...
अबकी बरस ये आंधी क़यामत ई है ले आई
इतनी बस गुजारिश है...गर थी रत्ती भर भी मोहब्बत इसे
जो बिछडा है आज तो पराया अब इसे न कर देना
लाज रख ले मेरे लव्जों की ,तो दुआ मेरा उधार सा रहा
बक्षी गर खुदा ne बुद भी कभी रूह को मेरी, हमेशा तेरा गुलाम कहलायेगा

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Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...