था इस कदर मोहब्बत हमसे के जालिम से बयान भी न हुआ और
करके नगमे दिल के बयान अपने अस्कों से जालिम ने कब्र मे भी जीने न दिया ...
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
wah wah masha-allah
ReplyDeletekya khoob kaha hai.