Friday, September 26, 2008

मोहब्बत . . .

था इस कदर मोहब्बत हमसे के जालिम से बयान भी न हुआ और
करके नगमे दिल के बयान अपने अस्कों से जालिम ने कब्र मे भी जीने न दिया ...

1 comment:

Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...