Tuesday, September 02, 2008

आज़ादी कहाँ ...

कोई रश्मो मैं तो कोई कसमो मैं बाँधता है मुझे
कमबख्त दिल की दुनिया मैं भी आज़ादी कहाँ

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Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...