ନିଜ ହାଡ଼ କୁ ପବ ପବ କରି ଚୁନା କରି ମୋ ମନରେ ଯିଏ ସୁନାର କଳ୍ପନା ସୃଜନ କରନ୍ତି, ମୋ ଓଠରେ ଟିକିଏ ହସ ଦେଖିବା ପାଇଁ ନିଜର ଆଖିର ତତଲା ଲୁହକୁ ଦେହର ଶିତଳ ଲହୁ ସହିତ ଯେ ମିଶାଇ ଚାଲିଥାଆନ୍ତି... ନିଜ ଜ଼ିବନର ସୁଖ ସଳିତାକୁ ତିଳ ତିଳ କରି ଜାଳି ମୋ ଜୀବନର ଚଳପଥକୁ ଆଲୋକିତ କରିବାରେ ଯିଏ ବ୍ୟସ୍ତ, ମୋତେ ମଣିଷ ପରି ମଣିଷ କରି ଗଢି ତୋଳିବା ପାଇଁ ଯିଏ ସର୍ବଦା ବ୍ୟଗ୍ର... ସେଇ ପରମ ପୂଜନୀୟ ମା ବାବାଙ୍କ ପାଦପଙ୍କଜରେ ଭକ୍ତି ଅର୍ଘ୍ୟ ଅର୍ପଣ
Friday, February 25, 2011
Is Railway Budget an Election or Bengal Budget ?
Thursday, February 24, 2011
प्रधान मंत्री की बेबसी और सरकार...
बड़े दिनों से कुछ बातें दिमाग मे अस्थिरता पैदा कर रही thi और शाम को जब भी में tv के सामने समाचार से रूबरू होता था ये बातें बड़ा परेशान करती थी ...
- दरदाम ब्रिधि पे प्रधान मंत्री - गरीबों के आमदनी बदना इसका मूल कारण है ।
- प्याज के बढती दाम पे कृषि मंत्री - पैदावार कम है और खपत ज्यादा है
- विदेशो मे जमा काला धन पे वित्तमंत्री - एक aakalan के आधार par उपाय बना रहे हैं ki टैक्स चुका कर बाकि का धन रख सकते हैं
- लाखों करोडो के घपले को काबू करने में असहाय प्रधानमन्त्री - गठ्वंधन सरकार ki कई मजबूरियां होती है
- महंगाई को काबू करने मे बिफल प्रधान मंत्री - में मजबूर हूँ।
आज जनता को ऐसी प्रधानमन्त्री ही नहीं चाहिए जो हर बात पे अपनी बिबसता और बिफलता गिनवाए ... और वो जो अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर हो और जिसकी ३० से ज्यादा सालो का अनुभव हो॥ उस से तो बिलकुल नहीं ... धन्य हो हमारी सरकार और उसके ये मंत्री,प्रधान मंत्री और घपलेबाजों का ये मंत्री मंडल...
