
उम्मीद भी न थी हमें की आप ऐसे गए
जैसे उमर की आड़ मैं लोग नही कई जिंदगी भी भूल गए
न जाने किस मोड़ पे हूँ यूँ छोड़ देंगे साथ जिंदगी का
चल तू साथ भले ये पल चंद ही सही ॥
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
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