
क्यों आंसू खुद के ही उन्हें कुछ खास लगते है
और अपने तो बस बहता पानी है।
गम नहीं गर वो हमें रोता न देखे ,
यूँ तो आँखों मे एक समंदर छुपा रखा है ....
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
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