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Friday, March 27, 2009

तलाश उस रब की

तलाश किसी को थी उस रब की,
तो हमने रस्ता मन्दिर का बताया ।
यूँ तो खुदा यहाँ भी था मौजूद मगर,
खुदाया दोनों मे ने मेरी बात ना मानी

Friday, March 20, 2009

मैंने क्या खोया और क्या पाया ...


माना खुदा मोहब्बत को अपनी तो क्या खोया और क्या पाया

यूँ तो लोग बूंद को तरसते रहे और मैंने है समंदर पाया

भले बिछ्डके आज उससे हूँ तनहा और जिंदा भी तो क्या हुआ

मरके कभी देख साकी मोहब्बत मैं तुने, क्या खोया और क्या पाया ...