Saturday, August 30, 2008

लिखता भी तो दर्द है ...

रात की कलि स्याही को दिल मैं कुछ ऐसे उतरा है

की कमबख्त लिखता भी तो दर्द है ...

1 comment:

  1. दर्द न हो तो ज़िन्दगी में ख़ुशी का अहसास ही कहाँ हो ?

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Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...