Tuesday, January 13, 2009

दिल की बेचैनी का ये सबब ये मिला है ...

कहीं दिल मैं मेरे यादों को समेटे कोई यूँ बैठा है

इस कदर दिल की बेचैनी का ये सबब ये मिला है ...

1 comment:

Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...