Tuesday, January 06, 2009

वक्त बेवक्त तुम यूँ याद न आया करो

वक्त बेवक्त तुम यूँ याद न आया करो
यूँ ही हमसे खामोशी भी ना छीना करो
केहनी थी जो बातें दिल की कभी तुम्हें
यूँ यादों मे आके उन्हें कुरेदा न करो...

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मेरी दास्तां ...

  क्या बताऊँ मैं अपनी दास्ताँ, ए दोस्त  हर मोड़ पे किसी अपनों ने ही आजमाया है....