
कत्ल के होंगे हज़ार तरीके इस जहाँ मे मगर
काफिर इस मोहब्बत से बच के दिखाओ तो जाने ...
ନିଜ ହାଡ଼ କୁ ପବ ପବ କରି ଚୁନା କରି ମୋ ମନରେ ଯିଏ ସୁନାର କଳ୍ପନା ସୃଜନ କରନ୍ତି, ମୋ ଓଠରେ ଟିକିଏ ହସ ଦେଖିବା ପାଇଁ ନିଜର ଆଖିର ତତଲା ଲୁହକୁ ଦେହର ଶିତଳ ଲହୁ ସହିତ ଯେ ମିଶାଇ ଚାଲିଥାଆନ୍ତି... ନିଜ ଜ଼ିବନର ସୁଖ ସଳିତାକୁ ତିଳ ତିଳ କରି ଜାଳି ମୋ ଜୀବନର ଚଳପଥକୁ ଆଲୋକିତ କରିବାରେ ଯିଏ ବ୍ୟସ୍ତ, ମୋତେ ମଣିଷ ପରି ମଣିଷ କରି ଗଢି ତୋଳିବା ପାଇଁ ଯିଏ ସର୍ବଦା ବ୍ୟଗ୍ର... ସେଇ ପରମ ପୂଜନୀୟ ମା ବାବାଙ୍କ ପାଦପଙ୍କଜରେ ଭକ୍ତି ଅର୍ଘ୍ୟ ଅର୍ପଣ
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
बारिश की महीन फुहारों में
ReplyDeleteजब तन मन भीगे जातें हैं
उनकी खामोश निगाहों के
वो पल तो ही तरसाते है
क्यों बोल नहीं सकते है वो
क्या अजब है उनकी ख़ामोशी
हम चुप्पी की भाषा सुनकर
बस मन ही मन इतराते है
वो हवा हवा ही रहते है
और आस पास मंडराते है
जाने उनके दिल में क्या है
पर हमको बहुत सताते है
पर हमको बहुत सताते हैं