Friday, November 14, 2008

रूख ज़िन्दगी का तेरे नाम किया है


शायद नशा ये मोहब्बत का सर मेरे चढ़ के बोला है
खता कहो मगर खुदा को भी हमने तुझसे तौला है
रब माफ़ करे या करे जहन्नुम मेरे नसीब
हमने तो रूख ज़िन्दगी का तेरे नाम किया है

1 comment:

Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...