सुना था केहते किसीको के आवाज़ दिल की खुदा को मंज़ूर है
माना था हमने तो खुदा उसको फिर भी नामंजूर ये दुआ, वजह क्या है ...
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
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