Wednesday, June 18, 2008

मंजिल

बंजारोंसे ना पूछो मंजिल का रास्ता …
उनका तो मौत भी बस एक रात का ठिकाना होता है

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Adab se..

वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...