ए ज़िन्दगी कुछ तो दे वक़्त मुझे संभल ने का
सीखा है अभी तो दो चार नुस्खे abhi
जितने भी मंज़र दिखाए अब तक
ऐसा लगता है के जाने का वक़्त भी आ गया
वे एक समंदर खँगालने में लगे हुए हैं, हमारी कमियाँ ढूँढने में लगे हुए हैं। जिनकी अपनी लँगोटियाँ तक फटी हुई हैं, वे हमारी पगड़ी उछालने में लगे...
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